स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी हैं बिहार विद्यापीठ की यादें

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आम जनता के चंदे से छह फरवरी 1921 को बिहार में बिहार विद्यापीठ की स्थापना की। इसके प्राचार्य देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद, उप-कुलपति ब्रजकिशोर प्रसाद और कुलपति मौलाना मजहरूल हक नियुक्त किए गए। विद्यालय के रूप में स्थापित बिहार विद्यापीठ बढ़ते क्रम में महाविद्यालय और विवि के रूप में विकसित हो गई। इससे संबद्ध होकर सैकड़ों विद्यालय कार्य करते रहे। ये बातें बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश ने कहीं।

मौका था बिहार विद्यापीठ के स्थापना दिवस पर कवि सम्मेलन के आयोजन का। विजय प्रकाश ने कहा कि वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय अंग्रेजों द्वारा इसे अपने कब्जे में ले लिया गया था, जिससे इसकी प्रगति पर विराम लग गया था। स्थापना दिवस के मौके पर देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के व्यक्तित्व पर केंद्रित रचनाओं का पाठ विजय प्रकाश ने किया। प्रकाश ने ‘संविधान के हम प्रहरी हैं, हमने मिलकर ठाना है, संविधान की शर्तो पर नियम हमें बनाना है’ पाठ कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। विजय प्रकाश ने कहा कि कहा कि महात्मा गांधी और देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के सपनों के अनुसार बिहार विद्यापीठ का दु्रत गति से विकास हो रहा है।

बीएड एवं डीएलएड, बिहार अंडा प्रचुरता अभियान, अटल इन्क्यूबेशन सेंटर आदि के साथ कौशल विकास के कई कार्यक्रम विद्यापीठ में चलाए जा रहे हैं। विद्यापीठ द्वारा गरीबी उन्मूलन संस्थान तथा इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग का कार्य भी प्रारंभ किया जा रहा है। प्रकाश ने ‘सूर्य और अ‌र्घ्य और संविधान’ पर अपनी कविताएं सुनाई। कवि सम्मेलन के दौरान योगेंद्र प्रसाद मिश्र, जय प्रकाश पुजारी, डॉ. रमाकांत पांडेय, डॉ. सुधा सिन्हा, प्रवीण कुमार, राजकुमार प्रेमी, अरुण कुमार मिश्र एवं देशरत्‍‌न राजेंद्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं में दिव्या, स्मिता, जूही, रश्मि आदि ने कविता पाठ किया।

कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक मंत्री डॉ. शिववंश पांडेय ने किया, वही डॉ. तारा सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत और डॉ. राणा अवधेश ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह के दौरान मनोज कुमार सिन्हा, श्यामल दास, प्राचार्य डॉ. पूनम वर्मा, रीना आदि मौजूद थे।

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